Saturday, September 17, 2016

उत्सुक निगाहों से ...





उत्सुक निगाहों से ...
कुम्हलाता है मन
धीरे-धीरे
सिसकते
दृश्य की तरह
सिर्फ अपनी ही तलाश में

उत्सुक निगाहों से ...
पूछती हैं प्रश्न कितने
झलक तुम्‍हारी
मौन रहकर
दायरे के कुछ यादों में
गुम होते अंधेरे की तरह

उत्सुक निगाहों से ...
रह-रहकर लेती है जन्म
सूखे पत्तों पर
बूंदों का अहसास
मुस्कान रहित सपनो की तरह
आँखों से दूर चली जाती  हैं

  उत्सुक निगाहों से ...                                                                                      

वेदना के पत्थरों की सिरा पर
फुट रहे थे झरने आखों से
थकी हुई इच्छाऐ थी
बेबस
उम्र के ढलान पर….

उत्सुक निगाहों से ...
साझं के
सन्नाटो की दुविधा में
टुटे निर्मोही रिश्ते कंधो पर लादे
मंजिलों को तरसती
टूटी दिवारें....


उत्सुक निगाहों से ...
आशा निराशा के
पल पल ओझल पडावो में
दूर तक फैली आंसुओ की झील
एकाकी निर्जन

सपने उलझाये....

  

Sunday, April 26, 2015

त्रासदी


आँखो के 
कुछ सहमे हुए सच
धडकनों की आहट
वेदना के विस्फोट 
अनचाही सच्चाई की
साँसें सिसकियों में 
बदल गयी !!!

Thursday, March 26, 2015

Monday, March 23, 2015

अंतीम राह

चित्र गुगल से साभार


अंतहीन सफर
अपने ही सायों के सिरों तक 
बिफरे हुये आकाश के आइनों में
वेदनाओं के पत्थर की सिरा पर

फुट रहे थे झरने आखों से
थकी हुई थी इच्छाऐ
समय था बेबस 
उम्र के ढलान पर

साझं के
सन्नाटो की दुविधा में
टुटे निर्मोही रिश्ते कंधो पर लादे
मंजिलों को तरसे टूटी दिवारें

आस्थाएं निराशाये
पल पल ओझल पडावो में
दूर तक फैले आंसुओ की झील
एकाकी निर्जन सपने उलझाये

साँझ 
धीरे धीरे गगन से उतरती हुई
अदृष्य को गढती गिले गालों पर 
निर्जीव मन में  सृजन करता गरल

टुटे हुये मन की छटपटाहट .......



Sunday, March 15, 2015

मौन

चित्र इन्टरनेट से साभार





अजनबी आवाजों की
मृगतृष्णा मे
जब मन हो जाएगा नम ।।
खो जाएँगे हवाओं में
फासलों को समेट कर
जब वक्त हो जाएगा कम ।।
मौन
मुझसे बना अपरिचित
जब आँखे तुम्हारी होगी नम ।।







Friday, March 13, 2015

आँसु




चित्र गुगल से साभार


 एक तीखी सी चुभन  
सूनी सी रातों में  
बीते हुए लम्हों की 
कसक और
एक आँसू ।

एक तीखी सी चुभन  
उम्मीद से बँधी साँसों में
एक शिकन की 
रेखा और
एक आँसू ।




Thursday, March 12, 2015

रचना 3

अपना ही
अंतिम सफर महसूस किया है
एक और जन्म की दौड में
पर
विलक्षण
मेरी आत्मा
विनम्र और सर्वशक्तिमान
अपने स्थिर द्वार पर
मौन !!!
चित्र गुगल से साभार


उम्र
परछाइयो के
अभाव में
बोझिल कदमों से
घुट कर भीतर
मौन
ढलती
अधुरी यादों में
बह गए